जीवनक जे अगिन-पथ के पार एताह
जीजिविषा मे से अजित,आजाद हेताह
बूड़ि,जे निष्ठाकेँ सदिखन मोन रखताह
ओ सियासी खेल मे बरबाद हेताह
माथ अछि जिनकर सिंहासन के चरण पर
आम-जन के माटि मे ओ खाद हेताह
ओ वैधानिक अनुकम्पा के प्रावधानसँ
मूल भए सकलाह नहि,अनुवाद हेताह
अछि हुनक निर्माण मे कोनो खराबी
उच्छिष्ट छथि ओ,तेँ कोना उत्पाद हेताह
धन्य!’अरबिन’ तों एलह मैथिल गजलमे
फेर केओ खुसरो की तोहर बाद हेताह
No comments:
Post a Comment